Shloka No.4

 किमप्यस्ति स्वभावेन सुन्दरं वाप्यसुन्दरम् ।

यदेव रोचते यस्मै तद्भवेत्तस्य सुन्दरम् ॥

Meaning: Is there anything that is beautiful or ugly inherently? Whatever appeals to whomever, looks beautiful to him.

भावार्थ: किसी भी वस्तु की सुन्दरता और कुरूपता का कारण उसके स्वभावगुण कहाँ होते है, जो जिसको प्रिय है, वही उसको सुन्दर प्रतीत होती है।

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