Shloka No.9

 नात्यन्त गुणवत् किञ्चित नाचाप्यत्यन्तनिर्गुणम् ।

उभयं सर्वकार्येषु दृष्यते साध्वासाधुवा ॥

Meaning:   There is no work which is good in all respects, nor bad in all respects Both good and bad exist in every work.

भावार्थ:   ऐसा कोई भी कार्य नही है, जो सर्वदा अच्छा हो, या सर्वदा बुरा हो, अच्छे और बुरे गुण तो प्रत्येक कार्य में होते ही है।


No comments:

Post a Comment