नात्यन्त गुणवत् किञ्चित नाचाप्यत्यन्तनिर्गुणम् ।
उभयं सर्वकार्येषु दृष्यते साध्वासाधुवा ॥
Meaning: There is no work which is good in all respects, nor bad in all respects Both good and bad exist in every work.
भावार्थ: ऐसा कोई भी कार्य नही है, जो सर्वदा अच्छा हो, या सर्वदा बुरा हो, अच्छे और बुरे गुण तो प्रत्येक कार्य में होते ही है।
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